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जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के पद हेतु विज्ञापन एवं आवेदन प्रपत्र

युद्ध विधवा छात्रावास में प्रवेश हेतु आवेदन पत्र एवं शपथ पत्र

सूचना का अधिकार प्रपत्र
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सभी गौरव सेनानियों/वीरांगनाओं और आश्रितों के लिये उपयोगी बातें

  • सेवानिवृत्ति के पश्चात प्रत्येक पूर्व सैनिक स्वयं को जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में पंजीकृत करायें।


  • जिला सैनिक कल्याण कार्यालय से पूर्व सैनिक पहचान पत्र (Ex servicemen I Card) प्राप्त करें।


  • ई.सी.एच.एस. के सदस्य बनें। सी.एस.डी. की सुविधा हेतु कैंटीन स्मार्ट कार्ड बनायें।


  • यदि विकलांग बच्चा है तो उसका भी पेंशन के लिए नामांकन करायें।


  • सेवामुक्त होने के उपरान्त बच्चे पैदा होने पर, तलाक, पुनर्विवाह, मृत्यु आदि प्रकरणों पर भाग दो आदेश (पार्ट -2 आर्डर) करायें। (जन्म प्रमाण पत्र, पुनर्विवाह प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र इत्यादि व पंचायत का पत्र लेकर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी से मिलें)


  • दस्तावेजों जैसे कि पेंशन, मेडिकल, ए.जी.आई. जायजाद, बैंक व कानूनी कागजातों की हिफाजत करें और आश्रितों को उनकी जानकारी करवाऐं।


  • सभी चल व अचल सम्पत्ति की वसीयत तैयार करके उन पर दो गवाहों के हस्ताक्षर होने चाहिए। हो सके तो यह नोटरी और रजिस्ट्रार के यहॉं दर्ज करायें। अपने छव्ज्ञ को इसके बारे में बताकर किसी सुरक्षित स्थान में रखें।


  • पेंशन पट्टे एवं पेंशन खाते में ज्वाईन्ट नोटिफिकेशन अपने वारिसों का नामांकन करवाऐं।


  • वीरांगनाओं को बिना सोचे-समझे किसी भी दस्तावेजों पर दस्तखत नहीं करने चाहिये।


  • वीरांगनाओं को उनके पति के मृत्यु के बाद मिली धनराशि को सिर्फ सरकारी बैंक / पोस्ट आफिस में ही जमा करना चाहिए।


  • पोस्ट आफिस की मासिक आय योजना (MIS) अधिक लाभकारी है, उसमें धन निवेश करें।


  • अधिक धन अर्जित करने के लिए किसी निजी संस्थाओं व व्यक्ति विशेष के प्रलोभन में आकर निवेश नहीं करें।


  • सभी योजनाओं में नामांकन फार्म में अपने आश्रित को नामित करायें।


  • निजी हथियार व गाडी, यदि हो तो इनके लाईसेंस को यथा समय नवीनीकरण करवाकर आश्रितों को इसकी जानकारी दें।


  • यदि पत्नी की मृत्यु स्वयं से पहले हो जाती है तो अभिलेखों में नया नामांकन करायें। गौरव सेनानी की मृत्यु के बाद एक पत्नी को अपने अधिकार व सुविधाओं का ज्ञान होना चाहिए।


  • थल सेना अध्यक्ष द्वारा संचालित एल्टीमेट डिसेन्ट राईटस हेतु जिला मुख्यालय पर संचालित सी.एस.डी. कैंटीन में पंजीकरण करवायें।


  • मृत्यु प्रमाण पत्र एक खास दस्तावेज है, जिसे मृत्यु होने पर तुरन्त ही इलाज करने वाले डाक्टर से प्राप्त करें ताकि मृतक का दाह संस्कार किया जा सके। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर नगर पालिका, कैंट बोर्ड अथवा ग्राम पंचायत से मृत्यु प्रमाण पत्र तीन प्रतियों में प्राप्त किया जा सकता है।


  • पेंशनर की मृत्यु होने पर, फैमिली पेंशन मिलने के लिए निम्न कार्यालयों को मृत्यु प्रमाण पत्र पेंशन पट्टे का विवरण सामूहिक बीमा निधि का विवरण आदि भेज कर सूचित करें -


Ø संबंधित अभिलेख कार्यालय
Ø सी.डी.ए. (पी) इलाहाबाद
Ø सी.डी.ए. (ओ) पूना (केवल अधिकारियों के लिए)
Ø सेना मुख्यालय, एम. पी - 5, ए.जी.ब्रान्च, पश्चिमी ब्लॉक- 3, आर.के.पुरम, नई दिल्ली-66 
      (केवल अधिकारियों के लिए)
Ø सेना मुख्यालय सी.डब्ल्यू.-4बी, सेना भवन, नई दिल्ली- 11 (केवल अधिकारियों के लिए)
Ø बैंक / कोषागार जहॉं से पेंशन ली जा रही हो।
Ø सेना सामूहिक बीमा, कार्यालय राव तुलाराम मार्ग, बसन्त विहार, नई दिल्ली-11
Ø सचिव, आवा, ए.जी.ब्रान्च, सेना भवन, नई दिल्ली- 11 Ø जिला सैनिक कल्याण अधिकारी

  • पति की मृत्यु के पश्चात पत्नी को तुरन्त बैंक में पेशन के खाते की सूचना सी.डी.ए. (पेंशन) को देनी चाहिए और उस खाते में भी एक आश्रित का नामांकन करायें (नए आदेशों के तहत आप पत्नी के साथ पेंशन खाता खोल सकते हैं)


  • पति के नाम का सी.एस.डी. और राशन कार्ड को अपने नाम पर बदली करायें।


  • विधवा पहचान पत्र के लिए तीन पास पोर्ट साईज फोटो, डिस्चार्ज बुक, पी.पी.ओ., पति का मृत्यु प्रमाण पत्र व पति का पूर्व सैनिक पहचान पत्र के साथ, अपने जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय से सम्पर्क स्थापित कर विधवा पहचान पत्र प्राप्त करें तथा मृतक पूर्व सैनिक के दाह संस्कार हेतु मिलने वाली धनराशि रूपये 3000/- के लिए आवेदन करें।


  • पति की मृत्यु की सूचना जिला सैनिक कल्याण अधिकारी व सी.एस.डी. के इन्चार्ज को देवं। आपके पति के दाह संस्कार के योगदान के अलावा उसे उचित सम्मान दिया जायेगा।


  • जिला सैनिक कार्यालय में जाते रहें ताकि नये आदेशों एवं कल्याणकारी योजनाओं से आप अवगत हो सकें।


  • सभी गौरव सेनानियों की रैली में भाग लेवें, आप आपस में मिलेगें, जानकारी मिलेगी और परेशानियों के निवारण के प्रयत्न किए जायेगें।


  • स्वयं पर विश्वास करें, स्वयं कार्य करने की क्षमता उत्पन्न करें व दूसरों से अपेक्षा न करें। “आप काज सो महाकाज”


  • पेंशन आते समय यह सुनिश्चित करें कि पेंशन अदायगी में आपका नम्बर, रैंक, नाम व पेंशन अदायगी ऑफिस एवं अकाउंट सही अंकित है।


  • जब आप पहली बार पेंशन लेने जायें तो आप अपनी पेंशन अदायगी आदेश अवश्य ले जावें।


  • समयावधि जीवन प्रमाण पत्र हर साल जब-जब आपका पेंशन अदायगी आफिस चाहे, उसे जमा करा दें। कोशिश करें कि पहली पेंशन लेने से पहले अकाउन्ट ट्रांसफर न किया जाये।


  • जहॉं तक संभव हो, आप अपना पेंशन अकाडंट ट्रांसफर न करें इससे दिक्कते आ सकती है।


  • यदि पेंशन अकाउंट का स्थानान्तरण अति आवश्यक है तो आप सबसे पहले अपने इच्छित बैंक में अपना नया अकाउन्ट खोलें। तत्पश्चात अपने पुराने बैंक में अकाउन्ट ट्रांसफर का अप्लिकेशन दें। आपका अमाउंट ट्रांसफर हो जायेगा।


  • आपको चाहिए कि आप अपना मासिक पेंशन लेते रहें। अगर किसी कारण से आप पेंशन कुछ समय के लिए नहीं लेना चाहते हैं तो बैंक को लिखित रूप में आपको बताना चाहिए।


  • उसके बाद जब आप पेंशन लेने जाते हैं तो आपको पेंशन पूरा एरियर के साथ ब्याज समेत देय होगा।


  • यकीन करें कि आपकी पेंशन का समय-समय पर होने वाला रिवीजन सही हो रहा है।


  • अगर आप विदेश जाना चाहते हैं तो आप अपना पेंशन अपने किसी संबंधी द्वारा ले सकते हैं, इसके लिए आपको बैंक से परामर्श करके पावर ऑफ अटारनी देय होगा। फिर जब आप वापस आते हैं तो एप्लिकेशन देकर पेंशन अपने नाम से स्वयं ले सकते हैं।


  • अगर आपको अपने पेंशन की रकम किसी कारण से कम मिलती है या आपको पेंशन अदायगी कार्यालय को कुछ दस्तावेज संबंधी अस्पष्टीकरण होता है तो आप पी.सी.डी.ए. (पे) इलाहाबाद एवं अभिलेख कार्यालय को लिख सकते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर डी.पी.एल.सी. सब एरिया, इलाहाबाद से सम्पर्क करके इसका निवारण करने में मदद ले सकते हैं।


  • सेवानिवृत्ति के पश्चात अगर आप पुनः सरकारी नौकरी पाते हैं तो इसकी सूचना अपने रिकार्ड आफिस तथा सर्विस हैडक्वार्टर को देनी चाहिए।


  • अगर आपने सेवानिवृत्ति के पश्चात विवाह किया है तो तत्काल इसकी सूचना अपने रिकार्ड आफिस को देनी चाहिए जिससे आपकी पत्नी का नाम आपके सरकारी दस्तावेजों में अंकित हो और भविष्य में उनको परेशानी न हो।


  • अगर आपने किसी कारणवश दूसरी शादी की है और पहली पत्नी से कोई संतान है तो आपके जीवनकाल में या उसके बाद जब तक आपका बच्चा 25 वर्ष का नहीं हो जाता आपके पेंशन कागजात पर आपकी दूसरी पत्नी का नाम नहीं लिखा जाएगा। बच्चे की उम्र 25 वर्ष होने के पश्चात आपको अपने रिकार्ड आफिस से सम्पर्क करना होगा। उसके बाद आपका नाम आपके पति के दस्तावेज में लिखा जाएगा और आप पारिवारिक पेंशन के हकदार होंगी।


  • अगर आप 1 जनवरी 86 से पहले के पेंशनर हैं तो आपकी पेंशन 1 जनवरी 1986 तथा 1 जनवरी 1996 से बढोतरी होनी है। आप अपने पेंशन वितरण अधिकारी से सम्पर्क करें। यदि कोई समाधान ना हो तो इस संबंध में आप अपने रिकार्ड आफिस से पत्र-व्यवहार कर सकते हैं और सी.डी.ए. (पे) इलाहाबाद से पत्र व्यवहार करके इस संबंध में सूचना प्राप्त कर सकते है।


  • अगर आप अप्रैल 1985 से पहले के अवकाश प्राप्त सैनिक हैं तो आपके पेंशन के कागजात (पीपीओ) पर आपकी पत्नी का नाम नही होगा। आपको अपने रिकार्ड आफिस से सम्पर्क करके अपना संयुक्त नोटिफिकेशन (Joint Notification) करना अनिवार्य है जिससे भविष्य में आपकी वैध पत्नी को फैमिली पेंशन मिलेगी।


  • अगर किसी वजह से आपके परिवार - पेंशन में पारिवारिक विवाद होता है तो इसकी सूचना अपने रिकार्ड आफिस को दें, जो इसका फैसला बी आर ओ अथवा जेड आर ओ से होगा और पेंशन कार्यालय तथा रिकार्ड को उनकी द्वारा दी गई संस्तुति सामान्यतः मान्य होगा।


  • आपका मेडिकल डिसेबिलिटी पेंशन अगर परमानेंट नहीं है तो आपको उसकी तिथि समाप्त होने से 6 महीने पहले अपने रिकार्ड आफिस से सम्पर्क करना चाहिए जिससे समय पर आपको आर एस एम बी हो तथा अशक्तता पेंशन चालू रहे। पत्र व्यवहार करते समय अपना आर्मी नम्बर और पी पी ओ नम्बर सही लिखें।


  • अगर आप पेंशन जाते समय परमानेन्ट मेडिकल कैटेगरी हैं तो आपको अशक्तता पेंशन सामायतः पूर्ण जीवन के लिए होता है जिसमें आपको महंगाई भत्ता देय होता है। इस संबंध में आप अपने पेंशन दस्तावेज की जॉंच कर सकते हैं और संदेह होने पर इसका स्पष्टीकरण सी.डी.ए. (पे) इलाहाबाद से प्राप्त कर सकते है।


  • अपने बच्चों का तथा परिवार में जन्म-मृत्यु की सूचना अपने जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के माध्यम से अपने रिकार्ड आफिस को अवश्य बतायें, इससे आपका अपना सर्विस दस्तावेज ठीक रहता है।


  • अगर पेंशनर की किसी भी वजह से मृत्यु होती है तो परिवार के उत्तराधिकारी लोगों को इसकी सूचना बैंक में मृत्यु प्रमाण पत्र द्वारा देनी चाहिए, जिससे आपका पारिवारिक पेंशन चालू हो सके।


  • पेंशनर की मृत्यु के पश्चात प्रथम पारिवारिक पेंशन लेने से पहले यह सुनिश्चित करें कि पेंशनर द्वारा नहीं ली गई पेंशन, एल.टी.ए. के रूप में आपको मिली है या नहीं। अपने बैंक / डी पी डी ओ से इस बात का स्पष्टीकरण लें।


  • अगर आपके परिवार में काई बच्चा मानसिक अथवा शारीरिक रूप से विकलांग हैं और वह अपनी जीविका उपार्जन करने में असमर्थ है तो वह जीवन भर अपने पिता / माता का पारिवारिक पेंशन पाने का हकदार होता है और अगर वह लडकी है तो शादीशुदा न हो। इसके लिए आपको अपने बच्चों की मानसिक अथवा विकलांगता अपने सर्विस दस्तावेज में दर्ज करना होता है। इसके लिए आपके जिले के सी.एम.ओ. द्वारा जारी की गई विकलांगता प्रमाण पत्र की मूल कॉपी अपने रिकार्ड आफिस और सर्विस हैडक्वार्टर को देना होता है।


  • आपके परिवार की तलाकशुदा या विधवा बेटी अगर पुनः शादीशुदा नही है तो उसको भी साधारण फैमिली पेंशन जीवनभर मिलती है, बशर्ते की उसकी मासिक आमदनी 2550/- मसिक से अधिक न हो और शादी न की हो। इस संबंध में 25 वर्ष उम्र की सीमा लागू नही है।


  • पति की मृत्यु के पश्चात साधारण पारिवारिक पेंशन लेने वाली पेंशनर अगर पुनः विवाह करती है तो पेंशन बंद हो जाती है।


  • स्पेशल और लिबरलाइज पेंशन प्राप्त पेंशनर अगर पुनः विवाह कर पेंशन बंद नहीं होती बशर्ते कि वह परिवार व बच्चों की देखभाल पालन पोषण करें अन्यथा पेंशन का उपयुक्त बंटवारा किया जाता है।


  • अगर आपके पति दो पेंशन प्राप्त कर रहे थे, उनकी मृत्यु के पश्चात सैनिक विधवा को एक ही पेंशन पाने का हक है। एक विभाग से पेंशन प्राप्त नहीं करने का प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा।

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