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भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य स्कीम ( सी एच एस)

1-  01 सितम्बर 2000 को भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य स्कीम के केन्द्रीय संगठन से प्राप्त जानकारी भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य स्कीम की प्रगति को दर्शाती है।

2- ''पात्र'' चिकित्सा उपचार की तुलना में ''प्राधिकृत'' चिकित्सा उपचार - सेवा में रहते हुए सशस्त्र बल के सभी रैंक के कार्मिक स्वयं के लिए अपने घोषित आश्रितों लिए पूर्ण एवं निःशुल्क चिकित्सा उपचार कराने के लिए प्राधिकृत है। तथापि सशस्त्र बल के चिकित्सा सेवा विनिमयों के अनुसार सेवानिवृत्ति के बाद पेंशनभोगी भूतपूर्व सैनिक (परिवार पेंशन लेने वालों सहित केवल दवाईयों की खरीद के लिए  100 रूपये प्रतिमाह चिकित्सा भत्ता लेने के हकदार हैं - यह राशि उनके पेंशन भुगतान आदेश में शामिल की जाती है अथवा इसके बदले में वे रक्षा सुविधा केन्द्रों निःशुल्क बहिरंग उपचार और अनुबंधित राशि का भुगतान करके कुछ अंतरंग रोगी सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं जो रक्षा कार्मिक चिकित्सा भत्ता ले रहे हैं उन्हें रक्षा अस्पतालों उपयोग करने दवाईयों लेने की अनुमति नही है। अतएव उन्हें उनका पात्रता और कल्याण संबंधी उपायों के अनुसार रक्षा अस्पतालों, ऑगमेटिड आर्मड फोर्स क्लिनक ( एफ सी) और चिकित्सा जॉंच कक्षा (एम आई कक्षा में यथा संभव सीमा तक उपचार मुहैया करवाया जाता था बशर्ते कि बिस्तर सुविधा और विशेषज्ञ उपलब्ध हों। इस तरह का उपचार किसी बडी बीमारी के लिए नही था और पत्नी को छोडकर कोई आश्रित इसमें शामिल नही था। इसके अतिरिक्त जिस स्टेशन में सैनिक अस्पताल / एफ सी / एम आई कक्षा नही है वहॉं पेंशनभोगी को अपनी व्यवस्था करनी होगी। समय के साथ साथ एक अन्य समस्या एम आई कक्ष (विशेषकर महानगरों में) अधिक संख्या में रोगी भर्ती हो गये ओर चिकित्सा संबंधी मौजूदा बुनियादी सुविधाओं से उनकी आकांक्षाओं को पूरा करना और उच्च कोटि का उपचार करना संभव नही हो पाया।

3-  भूतपूर्व सैनिकों की चिकित्सा संबंधी देखभाल (मेडिकेयर) में कमियॉं - सशस्त्र बलों के सेवानिवृत पेंशनभोगियों के लिए सेवानिवृत्ति पश्चात उचित मेडिकेयर स्कीम का अभाव था जैसी कि केन्द्र सरकार के अन्य कर्मचारियों के लिए स्कीम उपलब्ध है। एक अन्य प्रमुख कमी यह थी कि इस तरह की पात्रता में प्रमुख बीमारियों का उपचार शामिल नही था और प्रतिमाह चिकित्सा भत्ता के रूप में मिलने वाले 100 रूपये में सामान्य दवाईयों का खर्च भी मुश्किल से पूरा होता था। पेंशनभोगियों को कुछ राहत प्रदान करने के लिए अप्रैल 91 में थल सेना सामूहिक बीमा स्कीम के तहत निजी रूप से वित्त पोषित चिकित्सा सुविधा स्कीम (एम बी एस) और 1993 में वायु सेना सामूहिक बीमा स्कीम के तहत इसी तरह की चिकित्सा बीमा स्कीम (एम आई एस) शुरू की गई। इन स्कीमों के तहत विशेष रूप से अधिक खर्च वाली शल्य चिकित्सा / उपचार का खर्च वहन किाय गया किन्तु यह भी कुछ रोगों तक ही सीमित थी। इन सबकी अपर्याप्तता के कारण यह आवश्यक समझा गया कि सशस्त्र बलों के बढ़ते हुए पेंशनभोगियों की जरूरतों को पूरा करने और सेना अस्पतालों में बहिरंग रोगियों की संख्या को कम करने के लिए एक व्यापक स्वास्थ्य स्कीम तैयार की जाए।

4-  भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य स्कीम - उपर्युक्त के परिणामस्वरूप और विस्तृत विचार विमर्श के बाद पेंशनभोगी रक्षा कार्मिकों के लिए स्वास्थ्य स्कीम पर समेकित पत्र सरकार को प्रस्तुत किया गया जो अंततः 30 दिसम्बर 2000 के पत्र. सं. 22(1)/01/यूएस (डब्ल्यू ई)/डी (आर एस) के द्वारा सरकार द्वारा विधिवत स्वीकृत भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य स्कीम ( सी एच एस) के रूप में सामने आया। यह स्कीम 01 अप्रैल 2003 से लागू होगी। भारत सरकार / रक्षा मंत्रालय के उसी पत्र में विस्तृत नीतिगत ढांचा प्रस्तुत किया गया और विस्तृत प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रक्रियाओं के माध्यम से इसे लागू किया जाना था। भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य स्कीम को चलाने के लिए सशस्त्र बलों द्वारा सरकार को प्रस्तुत 11 प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं का रक्षा मंत्रालय द्वारा अलग से अनुमोदन किया जाना था जिसमें से आज की तारीख तक केवल तीन प्रक्रियाओं का अनुमोदन किया गया।

   उद्धेश्य

5-  पेंशनभोगी भूतपूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों, विधवाओं और परिवार पेंशन लेने वालों के लिए सभी स्टेशनों के 227 अखिल भारतीय पॉलिक्लिनिक में बहिरंग रोगी ( पी डी) सुविधाएॅं और सेना अस्पताल (शर्तो के अधीन) और पैनल में आने वाले सिविल अस्पतालों / निदान केन्द्रों और विशेषज्ञों के परामर्श के माध्यम से अंतरंग रोगी उपचार हेतु व्यापक एवं उच्च कोटि की चिकित्सा - देखभाल (सभी संभव बीमारियों के लिए प्रदान करना)

   सी एच एस के प्रमुख पहलू

6-  इस स्कीम में सैनिक और असैनिक स्टेशनों में पॉलिक्लिनिक - नेटवर्क के माध्यम से देश के दूरस्थ क्षेत्रों में बसे सभी पेंशनभोगी भूतपूर्व सैनिकों को शामिल किया गया है। इस स्कीम के तहत पेंशनभोगियों को अपने निवास स्थान के निकट की बहिरंग रोगी उपचार और दवाईयों की सुविधा मिलेगी और अब उन्हें सैनिक अस्पताल नही जाना पडेगा जो कि प्रायः बहुत दूर होते हेैं।

7-  यह स्कीम भारत सरकार द्वारा सेना के बजट में से सरकारी निधि से पूर्णतः वित्तपोषित है और इसके लिए सेवानिवृत्त होने वाले तथा सेवानिवृत्त रक्षा कार्मिकों से केवल न्यूनतम अंशदान लिया जाता है। इस स्कीम के तहत सभी तरह के व्यय की लेखा परीक्षा की जाएगी। चूंकि यह स्कीम भारत सरकार / रक्षा मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित है, इसके क्रियान्वयन की पद्धतियों को 30 दिसम्बर 2000 के व्यापक नीति संबंधी पत्र के आधार पर ग्यारह प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रियाओं के क्रम में निर्धारित किया गया है। सदस्य के अंशदान से स्कीम नही चलती है (जैसा कि सामान्यतः माना जाता है), इसकी राशि समेकित निधि में चली जाती है। वेतनभोगी से प्राप्त राशि और सरकारी लेखा से किए गए व्यय के बीच कोई संबंध नही है।

8-  इस स्कीम में 227 पॉलिक्लिनिक का नेटवर्क है - 104 पॉलिक्लिनिक सैनिक स्टेशनों पर रक्षा अस्पतालों (जहॉं - जहॉं ये अस्पताल हैं) के साथ स्थित हैं और 123 नए पॉलिक्लिनिक विनिर्दिष्ट असैनिक स्टेशनों पर हैं। इन पॉलिक्लिनिक की अवस्थिति और उनके आकार / प्रकार जिले में रहने वाले पेंशनभोगी भूतपूर्व सैनिकों की संख्या के आधार पर बनाया गया है।

9-  ईसीएचएस से रक्षा अस्पतालों में बहिरंग रोगियों की संख्या कम होगी क्योंकि सैनिक अस्पतालों के साथ ही पेंशनभोगी भूतपूर्व सैनिकों के लिए विशिष्ठ पॉलिक्लिनिक सुविधा होगी। स्टेशन कमांडर द्वारा नियुक्त विधिवत गठित अधिकारी बोर्ड के माध्यम से संविदा आधार पर अनुभवी और अच्छी देखभाल करने वाले पॉलिक्लिनिक स्टॉफ (मेडिकल स्टाफ और अन्य स्टाफ) को भर्ती किया जाएगा।

10-मौजूदा रक्षा अस्पतालों के अलावा, स्थानीय स्टेशन कमांडर द्वारा अधिकारी प्राप्त स्टेशन अधिकारी बोर्ड के माध्यम से अच्छे सिविल अस्पतालों / निदान केन्द्रों और योग्यता प्राप्त परामर्शदाताओं पर पैनल बनाया जाएगा। जिन रक्षा अस्पतालों में बिस्तर या कोई सुविधा उपलब्ध नही है वहॉं ये अस्पताल निदान केन्द्र बहिरंग रोगी को अस्पताल में रखने / उपचार कराने / जॉंच कराने की सुविधा प्रदान करेगें। आपात स्थिति में पैनल में नामजद अस्पतालों अथवा पैनल से इतर अस्पतालों में उपचार कराना संभव होगा - तथापित इस विवरण में आगे उल्लिखित नियम लागू होगें।

11-माता - पिता को भी इस स्कीम में शामिल किया गया है किन्तु शर्त यह है कि उनकी आय 1500 रूपये मासिक से कम हो। इस तरह 25 वर्ष की आयु तक के आश्रित बेरोजगार पुत्रों और अविवाहित तथा बेरोजगार पुत्रियों को भी इस स्कीम में शामिल किया गया है। शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग बच्चों को माता-पिता के मृत्यु के बाद भी जीवनपर्यन्त इस स्कीम का लाभ मिलेगा।

   सदस्यता के लिए पात्रता

12-सशस्त्र बलों के सभी पेंशनभोगी भूतपूर्व सैनिक, जो किसी भी तरह की पेंशन / अशक्तता पेंशन ले रहे हैं और पेंशन प्राप्त करने वाली विधवा / परिवार पेंशन प्राप्त करने वाले इस स्कीम के सदस्य बनने के पात्र हैं। विस्तृत नीति संबंधित पत्र जारी किया गया है जिसमें सदस्यता की पात्रता के लिए पूर्व शर्तो को स्पष्ट किया गया है। संयोगवश आवेदन करते समय पेंशनभोगी की आयु और पेंशनभोगी की चिकित्सीय स्थिति संबंधी कोई प्रतिबंध नही है।

13-पेंशनभोगी भूतपूर्व सैनिक के अलावा परिवार के निम्नलिखित सदस्य सी एच एस में शामिल हैं।

·         पति / पत्नी

·         25 वर्ष से कम आयु के बेरोजगार पुत्र

·         बेरोजगार या अविवाहित पुत्री और बेरोजगार तलाकशुदा विधवा पुत्री

·         आश्रित माता पिता, जिनकी आय 1500 रूपये प्रतिमाह से कम है।

·         मानसिक / शारीरिक रूप से विकलांग बच्चे जीवनपर्यन्त इस स्कीम के सदस्य होगें। ऐसे मामलों में सैनिक अस्पताल के विशेषज्ञ से प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है।

टिप्पणी - जब कभी पात्रता के संबंध में कोई संदेह हो तो मामला क्षेत्रीय केन्द्रों के माध्यम से केन्द्रीय संगठन को भेजा जाएगा। किसी भी परिस्थिति में ऐसे सदस्य को नामांकित नही किया जाएगा जो पात्र हो। ऐसे सभी मामलों में, आवदेक को यह स्पष्ट कर दिया जाए कि उसका आवेदन पत्र अन्तिम रूप से स्वीकार किया गया है।

14- सी एच एस में नामांकन ऐसे पेंशनभोगी भूतपूर्व सैनिकों, विधवाओं / मृत सैनिकों के परिवार पेंशन प्राप्तकर्ताओं के लिए स्वैच्छिक / वैकल्पिक है जो 31 मार्च 2000 को या उससे पहले सेवानिवृत्त हुए हैं जिन्होने स्कीम में शामिल होने का विकल्प दिया है उन्हें 100 रूपये मासिक चिकित्सा भत्ता मिलता रहेगा और वे आर एम एस एफ के तहत सीमित चिकित्सा सुविधाएॅं प्राप्त कर सकेगें। जैसा कि अब तक होता आया है। उन्हें किसी भी हालत में सी एच एस में शामिल होने का विकल्प का 31 मार्च 2008 तक इस्तेमाल करना होगा, इस तारीख के बाद स्कीम में शामिल नही किया जाएगा। तथापि, 1 अप्रैल 2003 से सेवानिवृत्त होने वाले रक्षा सेवा के सभी पेंशनभोगियों के लिए सी एच एस अनिवार्य है और इनेक अंशदान की सेवानिवृत्ति से पूर्व पी सी डी (पेंशन) द्वारा स्त्रोत पर कटौती की जाएगी।

सी एच एस में शामिल होने की प्रक्रिया (1.4.2003 से पूर्व कें पेंशन के लिए)

15-             चरण 1

(क)   पेंशनभोगी / विधवा / परिवार / पेंशनभोगी या उसका प्रतिनिधि सेना / नौसेना / वायु सेना के निकटतम स्टेशन मुख्यालय से 5 रूपये का भुगतान करके कम्प्यूटरीकृत आवेदन पत्र. ले सकता है। फार्म में इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है कि पेंशनभोगी अथवा विधवा अथवा परिवार पेंशनभोगी फार्म को कैसे भरेगा और फार्म के साथ सलंग्न किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची भी दी गई हैं जिन पेंशनभोगियों ने अप्रैल - मई 2003 में फार्म जमा कराए हैं उन्हें नए कम्प्यूटरीकृत फार्म भरने की आवश्यकता नही है।

(ख)   ये फार्म इंटरनेट की वेबसाईट (www.indianarmy.nic.in/arechs.htm) और  (www.irfsnausena.mil.in) पर भी उपलब्ध हैं।

16-              चरण 2

(क)   पेंशनभोगी / विधवा / परिवार पेंशनभोगी निर्दिष्ट 104 स्टेशन मुख्यालयों (और विशेष रूप से प्राधिकृत नौसेना और वायु सेना केन्द्र) में से किसी में भी पूरे भरे गए आवेदन पत्र और निम्निलिखित दस्तावेजों की मूल और फोटोप्रति के साथ स्वयं रिपोर्ट करें (पंजीकरण के लिए पेंशनभोगी के साथ परिवार के सदस्यों का आना अपेक्षित नही है। स्वयं रिपोर्ट करने का प्रयोजन मूल दस्तावेजों की सुरक्षा और ऐसे प्रश्नों के उत्तर देना है जो स्टेशन मुख्यालय के कर्मचारी संविक्षा करते समय आवेदक से पूछना चाहिए।

(1)   जिस बैंक / खजाना / डी पी डी से पेंशन ले रहें और उससे विधिवत सत्यापित पी पी ओ। यह अनिवार्य है।

(2)   सेवानिवृत्ति पुस्तिका निम्नलिखित को छोडकर सभी मामलों में अनिवार्य है -

(कक) जिन अधिकारियों / पी बी आर के कोई आश्रित सदस्य नही है उनके लिए यह अपेक्षित नही है।

(कख) यदि केवल पति / पत्नी आश्रित है तो दोनों की फोटो लगा जी आई एस / ए.एफ.जी.आई.एस. कार्ड पर्याप्त होगा। पति और पत्नी की पहचान के साक्ष्य के रूप में ए.जी.आई.एस./ए एफ जी आई एस कार्ड स्वीकार्य है।

(कग) नौसेना अधिकारी, जिन्हें सेवा-तनवृत्ति पुस्तिका जारी नहीं की गई है।

(कघ) वायु सेना अधिकारी, जिन्हें सेवानिवृत्ति पुस्तिका जारी नहीं की गई है।

(3)   पेंशनभोगी और उसके आश्रित की, प्रत्येक की, दो पासपोर्ट आकार की फोटो (आवेदन पत्र के पृष्ठ 8 और 9 पर - एक फोटो चिपकाऐं और एक-एक फोटो शपथ पत्र पर लगाऐं। शपथ पत्र में दिए गए अनुदेश भी पढें। फोटो पर नोटरी की मोहर लगाने की आवश्यक नही है - उस पर आश्रित सदस्य के हस्ताक्षर होने चाहिए अथवा यदि आश्रित सदस्य अवयस्क है तो आवेदक के हस्ताक्षर होने चाहिए।

(4)   अंशदान जमा कराने के साक्ष्य रूप में सेना प्राप्य आदेश की मूल प्रति संलग्न करें।

(5)   आवेदन पत्र के साथ नोटरी द्वारा विधिवत प्रमाणित शपथ पत्र की मूल प्रति ही प्रस्तुत की जाएगी। शपथ पत्र के केवल एक स्थान पर नोटरी के हस्ताक्षर होना अपेक्षित है।

(6)   जॉंच अधिकारी द्वारा सत्यापन के लिए भूतपूर्व सैनिक के पहचान पत्र यदि उपलब्ध है, की मूल प्रति प्रस्तुत की जाएगी। केन्द्रीय / राज्य / जिला सैनिक बोर्ड द्वारा जारी पहचान पत्र. स्वीकार्य नही है।

टिप्पणी : स्टेशन मुख्यालय के कर्मचारी सत्यापित फोटो प्रति की मूल दस्तावेज के साथ तुलना करेगें और मल प्रतियां तुरन्त पेंशनर को लौटा देगें। किसी तरह के संदेह के मामले में वे प्रश्न भी पूछ सकते हैं। फार्म भरने में किसी तरह की कठिनाई आने पर वे पेंशनर की सहायता भी करेगें। काम पूरा होने पर वे पेशनर को रसीद देगें। पेंशनर को रसीद की मूल प्रति संभाल कर रखनी चाहिए। पहचान संबंधी किसी विवाद दस्तावेजो साक्ष्य की अपर्याप्तता की स्थिति में मामला केन्द्रीय संगठन को भेजा जाएगा। ऐसे मामलों में जब तक केन्द्रीय संगठन अनुमति दे, आवेदन पत्र औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाएगा।

17-              चरण 3

(क)   स्टेशन मुख्यालय द्वारा सूचित किए जाने पर सी एच एस का सदस्यता स्मार्ट कार्ड लेने के लिए आवेदक को स्वयं आना होगा। आवेदन पत्र. प्राप्त करते समय स्टेशन मुख्यालय द्वारा दी गई रसीद स्मार्ट कार्ड लेते समय प्रस्तुत की जाएगी।

(ख)   कार्ड को सावधानीपूर्वक रखा जाना चाहिए क्योंकि सदस्यता कार्ड के बिना चिकित्सा उपचार करना संभव नही होगा।

टिप्पणी : स्मार्ट कार्ड के लिए पेंशनर का स्वयं जाना अपेक्षित है ताकि वह किसी गलत व्यक्ति को सौप दिया जाए। पेंशनर / विधवा को स्मार्ट कार्ड प्राप्त करने के प्रमाण स्वरूप स्टेशन मुख्यालय के मुख्य बहीखाते में हस्ताक्षर करने होगें।

18-              चरण 4

(क)   सदस्यों और आश्रितों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपने आवेदन पत्र में उल्लिखित निकटतम पॉलिक्लिनिक में स्मार्ट कार्ड के साथ संयुक्त रूप से या अकेले रिपोर्ट करें ताकि आवेदक और उसके परिवार के प्रत्येक सदस्य का फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक डाटा रिकार्ड किया जा सके। ऐसा स्मार्ट कार्ड प्राप्त करने के 120 दिन के अंदर किया जाना चाहिए।

(ख)   सी एच एस स्मार्ट कार्ड किसी भी सी एच एस पॉलिक्लिनिक में तब तक उपयोग में नहीं लाया जाएगा जब तक कि उसे काम में लाने के योग्य बनाया जाए।

(ग)   पॉलिक्लिनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करें बाद में जब भी पॉलिक्लिनिक जाऐं तो पेंशनर या उसके परिवार के सदस्य को पात्रता के प्रमाण स्वरूप सी एच एस स्मार्ट कार्ड ले जाना अनिवार्य है अन्यथा पॉलिक्लिनिक में व्यक्ति का उपचार नहीं हो पाएगा।

01 अप्रैल 2003 से सेवानिवृत्त होने वाले सैनिकों के लिए आवेदन प्रक्रिया

19.    (क) थल सेना, नौसेना / वायुसेना के आदेशों / अनुदेशों के माध्यम से अलग प्रक्रिया जारी की जा रही है। ये कार्मिक सेवानिवृत्ति की तारीख से इस स्कीम के स्वतः सदस्य बन जाऐगें।

(ख)   आवेदन पत्र ( सी एच एस मेडिकल 2003) सेवानिवृति के तारीख से काफी पहले प्रस्तुत किया जायेगा (जैसा कि आवेदन पत्र के सामान्य अनुदेशो में उल्लिखित है) आवेदन पत्र और शपथ पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। संबंधित प्रधान रक्षा लेखा नियंत्रक (सी डी पी) द्वारा सेवांत हितलाभों में से अंशदान की स्वतः कटौती कर ली जाएगी और पी पी पर ÷÷ सी एच एस अंशदान'' पृष्ठांकित किया जाएगा।

(ग)   संगठन यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि अधिकारियों के संबंध में उनकी यूनिट के माध्यम से और तीनों रक्षा सेवाओं के अधिकारी रैंक से नीचे के कार्मिकों के मामले में रेजिमेंटल केन्द्र / रिकार्ड कार्यालय / नौसेना कमोडोर ब्यूरो / (सी बी एस)/वायु सेना यूनिट के माध्यम से सेवानिवृत से 7-15 दिन पहले स्मार्ट कार्ड जारी किया जाए।

अंशदान

20.   भूतपूर्व सैनिक अंशदान की अदायगी एक बार में या लगातार तीन वार्षिक किश्तों में कर सकता है। अंशदान की राशि का उल्लेख आवेदन पत्र में किया गया है और यह भूतपूर्व सैनिक की मूल पेंशन (अर्थात संराशिकरण और मंहगाई भत्ते को छोडकर) के अनुसार होती है। इसे सेना प्राप्य आदेश के माध्यम से भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक / सरकारी खजाना में प्रेषित किया जाएगा। अंशदान भेजने की यह प्रक्रिया 1 अप्रैल 2003 के बाद सेवानिवृत होने वाले सैनिकों पर लागू नहीं होगी। 01 अप्रैल 03 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले सैनिकों के मामले में पी पीओ पर ÷÷ सी एच एस अंशदान'' पृष्ठांकित किया जाएगा। एक किश्त में सी एच एस का भुगतान करने वाले पेंशनर / विधवा पेंशनर को जीवनपर्यन्त सी एच एस सुविधा उपलब्ध रहेगी। यदि भुगतान तीन किश्तों में भेजा जाता है तो सी एच एस स्मार्ट कार्ड / चिकित्सा उपचार की वैधता भी उस अवधि तक वैध होगी जिस अवधि के लिए भुगतान किया गया है। किश्तों में भुगतान करने वाले पेंशनर स्टेशन मुख्यालय अथवा संबंधी प्रादेशिक कन्द्र को डाक द्वारा (सेना प्राप्य आदेश की मूल प्रति संलग्न करते हुए) यह सूचित करने के लिए जिम्मेदार है कि दूसरी और तीसरी किश्त देय होने पर जमा करा दी जाएगी। यदि अगली किश्त नियम तारीख को अदा नहीं की जाती है तो पॉलिक्लिनिक कार्ड रीडर ऐसे स्मार्ट कार्ड को स्वीकार नहीं करेगा और कार्ड स्वतः ही निष्क्रिय हो जाएगा अर्थात उपयोग में नही लिया जा सकेगा। तथापित जब अगली किश्त जमा हो जाती है और प्रमाण प्रस्तुत किया जाता है तो सी एच एस कार्ड का नवीनीकरण कराया जाएगा / काम मे लाने योग्य बनाया जाएगा। तीसरी और अंतिम किश्त का भुगतान होने के बाद स्मार्ट कार्ड पेंशनर के पूरे जीवन और आश्रितों की पात्रता अवधि तक के लिए काम में लाया जा सकेगा।

21.   सी एच एस की दरें सी जी एस की दरों के अनुरूप हैं। थल सेना प्राप्य आदेश द्वारा जमा की जाने वाली राशि निम्नानुसार है -

असरांशीकृत मूल पेंशन

(महंगाई भत्ता और अशक्तता पेंशन को छोड़कर)

एककालिक अंशदान दर

1500 रूपये तक

1800 रूपये

1501 - 3000 के बीच

4800 रूपये

3001 - 5000 के बीच

8400 रूपये

5001 - 7500 के बीच

12000 रूपये

7500 रूपये से अधिक

18000 रूपये

ई.सी.एच.एस. का सदस्य कौन है ? सी एच एस का सदस्य वही व्यक्ति है जिसके आवेदन पत्र की स्वयं की पात्रता उसके आश्रित सदस्य की पात्रता, विधवा की स्थिति और माता-पिता की पात्रता